क्या खेल रचती है माया
करो भजन बंदे,वहा तेरे साथ कुछ भी ना जाएगा,लेगा हरी का नाम जो भव से तर जाएगा।। रची प्रभु ने काया,जुड़ी है जिस से माया,ऋषियो ने भेद ना पाया,क्या खेल रचती है माया।। मात पिता से भी डोर करा दे,भाई और बेहन में फुट करा दे,अपनो से इसने डोर कराया,करमो से इसने कमाया,क्या खेल रचती … Read more